Monday, June 8, 2015

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योगवाशिष्ठ ग्रन्थ को महारामायण के नाम से भी जाना जाता है क्यों कि इसमेें महर्षि वाशिष्ठ ने भगवान् श्री राम को जीवन विज्ञान और योग विज्ञान की शिक्षा दी है ।उसमें ये बताया है कि चिज्जड़ ग्रंथि के टूटने पर सभी चक्र जाग्रत हो जाते हैं ।चिज्जड़ यानि (चित्त + जड़) अर्थात् चेतना का जड़ से पृथकता का अनुभव होना ।यही बात योगदर्शन के विभुतिपाद में वर्णित की गयी है ।अब चेतना की जड़ता से पृथकता कैसे हो इसके लिए एक विधि है , जो लिपिबद्ध नहीं की जा सकती ।योग दर्शन की किसी भी जिज्ञासा के लिए आपका स्वागत है ।......by Dr. Surendra Nath Panch

योग निद्रा ------------------- योग निद्रा एक परम् उत्कृष्ट निद्रा है, इसका अभ्यास हो जाने से मनुष्य के त्रिदोष सम्यक अवस्था में हो जाते हैं और व्यक्ति आदर्श स्वास्थ्य एवम् सौन्दर्य से युक्त रहता हुआ अतिशय सुखी, शांत ,प्रसन्न और आनंदित रहता है । योग निद्रा के लाभ =========== 1. योग निद्रा के अभ्यास से शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तनाव समाप्त हो जाते हैं । 2. एक - एक अंग की निष्क्रियता दूर होकर , उसमें नई चेतना और नई शक्ति का संचार होता है । 3. शरीर, मन और मस्तिष्क के रोग जैसे :- तनाव , मधुमेह , रक्तचाप , ह्रदय रोग तथा कमजोरी आदि से छुटकारा मिल जाता है । 4. योग निद्रा के अभ्यास से मन पर नियंत्रण होने लगता है । मन को स्थिर करके बहुत सी शक्तियां और सिद्धियाँ प्राप्त हो जातीं हैं । 5. योग निद्रा के अभ्यास से व्यक्ति में आलस्य नहीं रहता है, वह सदा सक्रिय रहता है । कार्य करने की शक्ति उसमें बराबर बनी रहती है । 6. योग निद्रा अंतर्मन में उतरने की सर्वसुलभ क्रिया है । इसके अभ्यास से व्यक्ति को निर्मलता , निश्चलता एवम् शांति प्राप्त होती है तथा मन , मष्तिष्क और स्नायु मंडल को शान्ति एवं शक्ति मिलती है । 7. इसके अभ्यास से व्यक्ति जहाँ अंतर्मन में गहरे उतर सकता है, वहीं साधना की ऊंची उड़ान भी भर सकता है और तन-मन में अद् भुद ताजगी एवं आनंद का अनुभव कर सकता है । 8. अभ्यास परिपक्व होने पर बहुत से रहस्य व्यक्ति के समक्ष उजागर होते जाते हैं । @सावधान +++++++ यह योग निद्रा पूर्णत: लेखनीबद्ध नहीं हो सकती है । ये एक अत्यंत ही प्रभावशाली योग है , इसे किसी विशेषज्ञ के निर्देशन में सीख लेना चाहिए ।।